गुरुवार, सितंबर 15, 2011

हिंदी की महिमा

एक अप्रवासी  भारतीय “लाला” ने
राजस्थानी देशी कन्या से
विवाह का मन बनाया  
हिंदी कम जानने के कारण
उसने ट्यूशन लगवाया
फिर अपने मास्टर को
नवाबीपन दिखाया
आप पैसों की चिंता
बिल्कुल मत कीजिए
जितनी जल्दी हो सके
बस हिंदी सीखा दीजिए
मास्टर भी निकला पक्का सरकारी
साईड बिजनेस में करता था ठेकेदारी 
उसने भी एक जबरदस्त शार्टकट निकाला
एक ही दिन में पूरा कोर्स निपटा डाला
बोला शिष्यजी एक काम कीजिए
मन में अच्छी तरह गाँठ बाँध लीजिए
किसी भी शब्द से पहले यदि
“कु” लगा हो तो अर्थ खराब होता है
उसी शब्द में यदि “सु” लग जाय तो
अर्थ बदल कर अच्छा हो जाता है
लाला बोला एक कष्ट कीजिए
उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए
गुरूजी बोला  अभी लीजिए
जैसे कुप्रबंध - सुप्रबंध
कुयोग्य - सुयोग्य
कुशासन – सुशासन
कुमति – सुमति
इत्यादि इत्यादि
लाला बोला थैंक्यू श्रीमान
हो गया हमे हिन्दी ज्ञान
लाला ने झटपट विवाह रचाया
और पहली बार ससुराल आया
सासु माँ ने धूमधाम से की अगुवाई
जैसे वनवास से लौटे हों रघुराई
माहौल था पूरे घर में दिवाली सा
बोली पधारो म्हारो देश “कुंवर” सा
लाला इससे परेशान हो गया
गुस्से से कुछ लाल हो गया
कहने लगा हमें भी हिन्दी आती है
आपकी बातें हमे कष्ट पहुँचाती है
खबरदार आप हमें कभी “कुंवर” सा ना कहें
कहना ही अगर जरूरी है तो
आगे से हमे “सुंअर” सा ही कहा करें !! जय हो !!

3 टिप्‍पणियां:

  1. ज़बरदस्त है, ऐसे ही एक विदेशी हिन्दी सीख कर हिन्दी न्यूज़ पेपर पढ़ रहा था , न्यूज थी " राम स्वरुप ने चोरी की, फल स्वरुप पकड़ा गया, " बेचारा परेशान-- जिसने चोरी की उसी को पकड़ा जाना चाहिए.

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  2. जय हो लाला की और सुसरे को पढ़ाने वाले की

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