मंगलवार, जुलाई 05, 2011

ऐसा क्यूँ होता है

रहनुमा चाटुकार, ऐसा क्यूँ होता है !
कातिल पहरेदार, ऐसा क्यूँ होता है !

हर शख्स अपने ही साये से खौफजदा
मुल्क का ये हाल, ऐसा क्यूँ होता है !

घोड़ो को खाने के लाले पड़े हुए हैं ,
गधे मलाईदार, ऐसा क्यूँ होता है !

गोडसे के कृत्य का तरफदार नहीं हूँ ,
कसाब शाहीखर्च पर, ऐसा क्यूँ होता है !

आसमां सुर्ख हुआ तो बना साम्प्रदयिक,
धर्मनिरपेक्ष हरियाली, ऐसा क्यूँ होता है !

तन्हा चल पढ़ा हूँ अपनी डगर “काफिर”
उस पर भी तँजदारी, ऐसा क्यूँ होता है !

1 टिप्पणी:

  1. घोड़ो को खाने के लाले पड़े हुए हैं ,
    गधे मलाईदार, ऐसा ही होता है

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